गाजियाबाद | थाना साहिबाबाद, चौकी शहीद नगर
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके से सामने आया एक मामला अब सिर्फ गुमशुदगी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन चुका है।
26 अप्रैल 2026, शाम करीब 3:30 बजे से एक 24 वर्षीय युवती लापता है, लेकिन 7 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की कार्रवाई ढीली, धीमी और सवालों के घेरे में नजर आ रही है।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी, लेकिन FIR दर्ज करने के बजाय मामला सिर्फ जनरल डायरी (GD) में दर्ज कर दिया गया—जैसे यह कोई मामूली घटना हो।
क्या एक बेटी का लापता होना अब सिर्फ “एंट्री नंबर” बनकर रह गया है?
क्या कार्रवाई का पहिया तभी घूमेगा, जब मामला और गंभीर हो जाएगा?
इस पूरे प्रकरण में SI मुशाहिब हुसैन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि लगातार गुहार के बावजूद ना सर्च ऑपरेशन तेज किया गया, ना कोई ठोस दिशा में जांच आगे बढ़ी।
एक तरफ परिवार—बेबस, टूटता हुआ, हर दरवाजे पर दस्तक देता हुआ…
दूसरी तरफ सिस्टम—खामोश, सुस्त और जिम्मेदारी से बचता हुआ…
मां-बाप की आंखों में सिर्फ आंसू नहीं, बल्कि बेचैनी और डर साफ दिखाई दे रहा है। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद कम होती जा रही है और सवाल बड़ा होता जा रहा है
आखिर हमारी बेटी कहां है… और उसे ढूंढने की जिम्मेदारी किसकी है?”
स्थानीय लोगों में भी आक्रोश बढ़ रहा है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला जन आक्रोश का रूप ले सकता है।
यह सिर्फ एक केस नहीं—यह सिस्टम की संवेदनशीलता की परीक्षा है।
अगर अब भी पुलिस नहीं जागी, तो यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामी का बड़ा उदाहरण बन जाएगा।
अब निगाहें एक ही सवाल पर टिकी हैं
क्या गाजियाबाद पुलिस जागेगी… या एक और बेटी फाइलों में दब जाएगी?

