रिपोर्ट: शमशाद आलम, ब्यूरो
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बस्ती जनपद में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूनिसेफ एवं दिशा संस्था के सहयोग से एक महत्वपूर्ण एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों तथा लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम के लिए समाज में व्यापक जागरूकता पैदा करना है।
पुलिस लाइन सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में पुलिस विभाग, विभिन्न सरकारी विभागों, यूनिसेफ और दिशा संस्था के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में अधिकारियों और महिला पुलिस कर्मियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, किशोरियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता, वैवाहिक अधिकार और सामाजिक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इसके बाद अतिथियों का स्वागत लाइव प्लांट भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन महिला थाना प्रभारी शालिनी सिंह ने किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बस्ती परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक संजीव त्यागी मौजूद रहे। वहीं पुलिस अधीक्षक बस्ती डॉ. यशवीर सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इसके अलावा जिले के सभी पुलिस सर्किलों से पुलिस उपाधीक्षक, विभिन्न थानों के मिशन शक्ति केंद्र प्रभारी, महिला पुलिस कर्मी, यूनिसेफ प्रतिनिधि और दिशा संस्था की टीम ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
‘बहू-बेटी सम्मेलन’ का उद्देश्य बताया गया
कार्यक्रम के दौरान मंडलीय बाल संरक्षण सलाहकार यूनिसेफ शैलेश प्रताप सिंह ने कार्यशाला की रूपरेखा और उद्देश्यों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि “बहू-बेटी सम्मेलन” पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों के प्रति समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है।
उन्होंने कहा कि यदि समाज में महिलाओं को समान अवसर और सम्मान मिले तो सामाजिक विकास की गति और अधिक तेज हो सकती है।
किशोरियों के घर छोड़ने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता
अपने संबोधन में पुलिस उप महानिरीक्षक संजीव त्यागी ने वर्तमान समय में किशोरियों के घर से भागने की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि यह केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने मिशन शक्ति केंद्रों को निर्देशित किया कि वे किशोरियों और किशोरों के बीच संवाद स्थापित कर उन्हें जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के प्रति जागरूक करें।
संजीव त्यागी ने कहा कि परिवार और समाज को बच्चों की भावनाओं को समझने की आवश्यकता है। संवाद की कमी कई बार ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न कर देती है जो बाद में गंभीर समस्याओं का कारण बनती हैं।
आर्थिक आत्मनिर्भरता को बताया महिला सशक्तिकरण की कुंजी
कार्यशाला के दौरान महिला सशक्तिकरण के विषय पर चर्चा करते हुए संजीव त्यागी ने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम महिला अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक होती है और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न का प्रभावी ढंग से विरोध कर सकती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल सुरक्षा प्रदान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी उतना ही आवश्यक है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो वे अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लेने में सक्षम होंगी।
उन्होंने सरकारी योजनाओं की जानकारी महिलाओं तक पहुंचाने और उन्हें विभिन्न लाभकारी कार्यक्रमों से जोड़ने पर भी जोर दिया।
विवाह संबंधी निर्णयों में महिलाओं की सहमति जरूरी
कार्यक्रम में संजीव त्यागी ने विवाह संबंधी मामलों पर भी महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक लड़की को अपने विवाह से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई बार बिना सहमति के किए गए विवाह भविष्य में वैवाहिक विवाद, मानसिक तनाव और सामाजिक समस्याओं का कारण बनते हैं। इसलिए परिवारों को चाहिए कि वे बेटियों की इच्छा और राय का सम्मान करें।
उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों पर अपने निर्णय थोपने के बजाय उन्हें समझने और मार्गदर्शन देने का प्रयास करें।
महिला सशक्तिकरण का सही अर्थ समझने की जरूरत
अपने संबोधन में पुलिस उप महानिरीक्षक ने कहा कि समाज में कई बार महिला सशक्तिकरण की अवधारणा को गलत तरीके से समझा जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ पुरुषों के विरोध में खड़ा होना नहीं है, बल्कि महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, समान अवसर और निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सशक्त होंगी तो वे अपने परिवार और समाज दोनों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
पुलिस की निष्पक्ष भूमिका पर दिया विशेष बल
संजीव त्यागी ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने कार्यों में पूरी तरह निष्पक्ष और पेशेवर दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस का कार्य किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं बल्कि कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करना है। विशेष रूप से वैवाहिक विवादों और पारिवारिक मामलों में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि निष्पक्ष पुलिसिंग से ही जनता का विश्वास मजबूत होता है और न्याय व्यवस्था प्रभावी बनती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं तक पहुंचने का आह्वान
पुलिस अधीक्षक बस्ती डॉ. यशवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “बहू-बेटी सम्मेलन” समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने हाल ही में भर्ती हुई महिला आरक्षियों से विशेष रूप से अपील की कि वे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर महिलाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दें।
उन्होंने कहा कि कई महिलाएं जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पातीं। ऐसे में महिला पुलिस कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
समाज में सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद
कार्यशाला के समापन पर वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि “बहू-बेटी सम्मेलन” जैसी पहलें महिलाओं और बालिकाओं के प्रति समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए कार्य करें तो एक सुरक्षित, समान और सशक्त समाज का निर्माण संभव है। बस्ती में आयोजित यह कार्यशाला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले समय में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता को नई मजबूती प्रदान कर सकती है।

