- दिल्ली की मंडोली जेल एक बार फिर सनसनीखेज आरोपों से दहल उठी है। जेल नंबर 11 से सामने आई कहानी किसी फिल्मी गैंगवार से कम नहीं लग रही। आरोप ऐसे कि सुनकर हर कोई सन्न रह जाए!
जावेद उर्फ टोनी के परिजनों का दावा है कि मंडोली जेल के अंदर “दो कानून” चलते हैं —
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एक उन लोगों के लिए जिनके पास पैसा और पहुंच है…
और दूसरा उन कैदियों के लिए जो सिस्टम के आगे झुकने से इनकार कर दें।
परिवार का आरोप है कि जावेद उर्फ टोनी को जेल के अंदर पहले धमकाया गया, फिर कैदियों के जरिए उस पर चाकू से जानलेवा हमला करवाया गया। बताया जा रहा है कि हमला इतना खतरनाक था कि जेल के अंदर अफरा-तफरी मच गई और खून से लथपथ हालत में उसे तुरंत गुरु तेग बहादुर अस्पताल ले जाना पड़ा।
सूत्रों की मानें तो हमला कोई मामूली झगड़ा नहीं था, बल्कि “सिस्टम के खिलाफ बोलने” की सजा बताई जा रही है। परिवार का आरोप है कि जेल के अंदर कुछ लोगों का ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है जो कैदियों को डराने, दबाने और चुप कराने का काम करता है।
इतना ही नहीं, परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए DS अशीष धामा का नाम भी इस पूरे विवाद में जोड़ा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े आरोपों के बाद भी जेल प्रशासन खामोश क्यों है?
परिवार का कहना है कि मंडोली जेल में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी मारपीट, वसूली, गैंगबाजी और कैदियों पर हमलों की चर्चाएं सामने आती रही हैं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया।
अब सवालों की आग तेज हो चुकी है —
क्या मंडोली जेल “सुधार गृह” कम और “अंदरूनी गैंगों का अड्डा” ज्यादा बन चुकी है?
क्या जेल की सलाखों के पीछे चल रहा है डर, पैसे और दबाव का काला खेल?
और सबसे बड़ा सवाल — अगर एक कैदी जेल के अंदर ही सुरक्षित नहीं, तो फिर सुरक्षा का दावा आखिर किस बात का?
अब सबकी नजर तिहाड़ जेल प्रशासन और दिल्ली जेल प्रशासन पर टिकी है कि इन आरोपों पर क्या कार्रवाई होती है।

