Friday, August 14, 2026
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योग और वैदिक ज्ञान से ही विश्वगुरु बनेगा भारत : स्वामी महेश योगी

रिपोर्ट: शमशाद आलम, ब्यूरो

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उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित हुई ऑनलाइन व्याख्यानमाला

प्रयागराज में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित व्याख्यानमाला श्रृंखला के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में सात दिवसीय व्याख्यानमाला के क्रम में एक प्रेरणादायी ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में योग, वैदिक ज्ञान, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में शिक्षक, शोधार्थी, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।

भारत संतों और ऋषियों की पुण्यभूमि : स्वामी महेश योगी

मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. स्वामी महेश योगी ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि यह संतों, ऋषियों, मुनियों और तपस्वियों की पुण्यभूमि है।

उन्होंने कहा कि योग, वैदिक ज्ञान और सनातन संस्कृति की शक्ति के आधार पर भारत पुनः विश्वगुरु का स्थान प्राप्त कर सकता है। भारत खोज और शोध की भूमि है, जहां ज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाने का आह्वान

अपने संबोधन में स्वामी महेश योगी ने भगवान श्रीराम के आदर्शों, भगवान श्रीकृष्ण के योग तथा भगवान हनुमान के ज्ञान, पराक्रम और गुरु भक्ति का उल्लेख किया।

उन्होंने विद्यार्थियों से इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि माता-पिता और गुरु का सम्मान, संस्कारयुक्त शिक्षा, ज्ञान, भक्ति और कर्म का संतुलन ही एक श्रेष्ठ नागरिक का निर्माण करता है।

युवाओं में चरित्र निर्माण पर दिया जोर

स्वामी महेश योगी ने युवाओं में अनुशासन, ऊर्जा, पुरुषार्थ और चरित्र निर्माण के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चार पुरुषार्थों तथा भारतीय संस्कृति के षोडश संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व निर्माण के लिए आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों का विकास आवश्यक है।

योग को बताया आत्मचेतना का माध्यम

उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि आत्मचेतना को परमचेतना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

उन्होंने अष्टांग योग, सप्त चक्र, चेतना शक्ति, तपोवन की वैज्ञानिक परंपरा और मानव चेतना के विकास जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की।

उनका कहना था कि निरंतर साधना, विनम्रता और आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से व्यक्ति जीवन के चारों पुरुषार्थों को प्राप्त कर सकता है।

स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद से प्रेरणा लेने का आह्वान

स्वामी महेश योगी ने युवाओं से स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

संस्कृति और परंपराओं को संजोकर आगे बढ़ रहा भारत

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि यह व्याख्यानमाला भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बौद्धिक पहल है।

उन्होंने कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को संजोते हुए विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की सांस्कृतिक गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किया गया है।

नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों से जोड़ने पर जोर

कुलपति ने मुख्य वक्ता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विचार नई पीढ़ी को भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि युवाओं को ज्ञान, कौशल और संस्कार से समृद्ध बनाकर विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनाना समय की आवश्यकता है।

राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना बढ़ाने का उद्देश्य

जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चंद्र मिश्र ने बताया कि व्याख्यानमाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रभाव, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों का विकास करना है।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और जीवन मूल्यों के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।

कई शिक्षाविदों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम में प्रोफेसर संजय सिंह ने अतिथियों का स्वागत और विषय की प्रस्तावना प्रस्तुत की। संचालन डॉ. सुनील कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर आनंदानंद त्रिपाठी द्वारा किया गया।

निष्कर्ष

प्रयागराज में आयोजित इस व्याख्यानमाला के माध्यम से भारतीय संस्कृति, योग, वैदिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। वक्ताओं ने युवाओं से भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

आयोजकों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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