स्टेट हेड प्रियांशु मिश्रा
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बाराबंकी। जिले के फतेहपुर क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता निशा देवी ने मुख्यमंत्री को भेजे प्रार्थना पत्र में अस्पताल के डॉक्टरों और संचालकों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही, ऑपरेशन के बाद पेट में मेडिकल सामग्री छूटने और बाद में नवजात की मौत होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थी महिला
शिकायत के मुताबिक, निशा देवी को 21 मई 2026 को प्रसव के लिए न्यू हिन्द हॉस्पिटल, भगौली रोड, कस्बा फतेहपुर, जिला बाराबंकी में भर्ती कराया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि अस्पताल में उसका ऑपरेशन किया गया। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान कथित तौर पर लापरवाही बरती गई, जिसके बाद महिला की तबीयत और उपचार को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो गई।
पेट में मेडिकल पैड छोड़े जाने का आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि ऑपरेशन के बाद पेट के अंदर मेडिकल पैड यानी सर्जिकल गॉज/कपड़ा कथित तौर पर छूट गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस कथित गलती को छिपाने के लिए बाद में दोबारा ऑपरेशन किया गया, जिससे उसके आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचा। इन आरोपों की पुष्टि किसी स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच या आधिकारिक रिपोर्ट से इस समय सामने नहीं आई है।
डिलीवरी के दौरान नवजात की मौत का दावा
शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया है कि डिलीवरी के समय नवजात बच्चा हाथ से छूटकर नीचे गिर गया और नाक से खून आने के बाद उसकी मौत हो गई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शिकायतकर्ता ने अस्पताल की व्यवस्था और इलाज में कथित लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, नवजात की मौत का वास्तविक कारण क्या था, यह चिकित्सकीय जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकता है।
इलाज में ₹2.50 लाख खर्च होने का आरोप
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि घटना के बाद महिला के इलाज में करीब 2.50 लाख रुपये खर्च हुए। शिकायतकर्ता ने अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री से जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को दिए प्रार्थना पत्र में पूरे मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत के अनुसार, संबंधित अस्पताल के डॉक्टरों और संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने की गुहार लगाई गई है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। ऐसे मामलों में अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन से संबंधित दस्तावेज, चिकित्सकीय रिपोर्ट, नवजात की मृत्यु से संबंधित रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग इस शिकायत पर जांच शुरू करता है, तो उसके निष्कर्षों से ही यह स्पष्ट होगा कि इलाज के दौरान वास्तव में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।
फिलहाल मामला शिकायत और लगाए गए आरोपों के स्तर पर है। संबंधित अस्पताल और डॉक्टरों का पक्ष सामने आने के बाद खबर का दूसरा पहलू भी स्पष्ट हो सकेगा। निष्पक्ष जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय होना उचित होगा।

