स्टेट हेड प्रियांशु मिश्रा
फतेहपुर बाराबंकी। फतेहपुर में सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर बना पटेल पार्क इन दिनों अपने इस्तेमाल को लेकर सवालों के घेरे में है। विगत कई वर्षों से मौजूद इस पार्क में सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रम तो लगातार होते रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस पार्क को आम जनता के लिए विकसित किया गया था, उसका लाभ सुबह टहलने आने वाले लोगों को ही नहीं मिल पा रहा है।
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रिकॉर्ड के मुताबिक जनवरी 2020 में भी रामनगर मार्ग स्थित सरदार पटेल पार्क में किसान कल्याण मेले का आयोजन हो चुका था। वर्ष 2023 में यहां सरकारी रोजगार मेले का आयोजन भी दर्ज है। हाल के वर्षों में भी सामूहिक विवाह जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम इसी परिसर में आयोजित किए गए हैं।

लेकिन अब स्थानीय लोगों की शिकायत है कि पार्क के भीतर नगर पंचायत से जुड़ी मशीनें और दूसरे सामान रखे जा रहे हैं। आरोप है कि पार्क का एक हिस्सा सार्वजनिक उपयोग के बजाय सामान रखने और कर्मचारियों के इस्तेमाल में आ रहा है।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि पार्क का गेट नियमित रूप से बंद रहता है और सुबह टहलने आने वाले लोगों को कई बार अंदर प्रवेश नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि यदि पार्क जनता के लिए बनाया गया है तो उसे निर्धारित समय पर आम लोगों के लिए खुला रखा जाना चाहिए।

सबसे गंभीर आरोप पार्क के रखरखाव को लेकर है। स्थानीय लोगों का दावा है कि नगर पंचायत के कर्मचारी रात में परिसर में रुकते हैं और गेट पर ताला लगा दिया जाता है, जिसके कारण सुबह आने वाले लोगों को परेशानी होती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
वहीं राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा इसलिए चर्चा में है क्योंकि विधायक साकेन्द्र प्रताप वर्मा ने हाल में अपने विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए फतेहपुर में कूड़े के ढेर पर पार्क बनाए जाने की बात कही थी।
ऐसे में सवाल यह है कि जिस पार्क को सार्वजनिक सुविधा के तौर पर विकसित किए जाने की बात कही गई, क्या वह वास्तव में आम नागरिकों के लिए नियमित रूप से उपलब्ध है? अगर पार्क नगर पंचायत के अधीन है तो वहां मशीनें और निजी उपयोग का सामान रखने की अनुमति किस आधार पर दी गई? पार्क खोलने और बंद करने का आधिकारिक समय क्या है और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?

एक और अहम सवाल पार्क की लागत को लेकर भी है। उपलब्ध रिकॉर्ड में पार्क के मूल निर्माण की कुल लागत का प्रमाणित आंकड़ा सामने नहीं आता।
अब स्थानीय लोगों की मांग है कि नगर पंचायत और प्रशासन पार्क की स्थिति स्पष्ट करे, मशीनों और अन्य सामान को सार्वजनिक पार्क परिसर से हटाया जाए और आम नागरिकों के लिए पार्क को नियमित रूप से खोला जाए।

फिलहाल सवाल सिर्फ एक पार्क का नहीं, बल्कि उस सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल का है जिसे जनता की सुविधा के लिए बनाया गया बताया जाता है।

