Saturday, October 10, 2026
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बाहर की दवा पर शुल्क! हिंद हॉस्पिटल की नई व्यवस्था पर उठे सवाल

सत्य प्रकाश शुक्ला जिला ब्यूरो चीफ सीतापुर बिसवां 

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गरीब मरीज लाइन में गिरा, फिर भी नहीं पसीजा सिस्टम

अटरिया के चर्चित हिंद हॉस्पिटल की फार्मेसी व्यवस्था विवादों में

अटरिया, सीतापुर। जनपद के अटरिया क्षेत्र स्थित चर्चित हिंद हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला अस्पताल की नई फार्मेसी व्यवस्था को लेकर है, जहां बाहर से दवा लाने वाले मरीजों से अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने के आरोप लगे हैं। अस्पताल परिसर में लगी एक नोटिस ने मरीजों और स्थानीय लोगों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करते हुए कहा है कि यदि कोई मरीज अस्पताल की मेडिकल स्टोर से दवा नहीं खरीदता और बाहर से दवा लेकर आता है, तो उसे अलग से शुल्क जमा करना होगा। सामान्य मरीजों के लिए ₹50 तथा कार्डियोलॉजी और न्यूरो विभाग के मरीजों के लिए ₹100 निर्धारित किए गए हैं। शुल्क जमा होने के बाद ही बाहर से लाई गई दवा का उपयोग अस्पताल में किया जाएगा।

इस व्यवस्था के बाद लोगों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या मरीज अब अपनी पसंद से दवा भी नहीं खरीद सकता? और अगर खरीदता है तो उसे अतिरिक्त शुल्क क्यों देना पड़ेगा?

लाइन में लगा मरीज हुआ बेहोश

इसी बीच बुधवार को एक संवेदनशील घटना भी सामने आई। जानकारी के अनुसार रहुआ निवासी कलाउ पुत्र मैकूलाल, जो चर्म रोग से पीड़ित था, इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह अस्पताल की मेडिकल स्टोर से महंगी दवा खरीदने के बजाय बाहर से दवा लाया था और शुल्क जमा करने के लिए लाइन में लगा था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लंबी लाइन और बीमारी की हालत के चलते वह फार्मेसी काउंटर के पास ही अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। लोगों का आरोप है कि काफी देर तक मरीज वहीं पड़ा रहा, लेकिन अस्पताल स्टाफ की ओर से तत्काल मदद नहीं की गई। घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में गुस्सा बढ़ गया।

“पैसा दो तभी दवा मान्य” — लोगों में नाराजगी

स्थानीय लोगों और तीमारदारों का कहना है कि यदि निर्धारित शुल्क जमा नहीं किया जाता तो डॉक्टर बाहर से लाई गई दवा इस्तेमाल करने से मना कर देते हैं। लेकिन शुल्क जमा करते ही वही दवा मान्य हो जाती है। इसी बात को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि बाहर की दवा असुरक्षित है तो पैसे जमा करने के बाद वह सुरक्षित कैसे हो जाती है?

अस्पताल प्रबंधन ने दी सफाई

मामले को लेकर अस्पताल की चेयरपर्सन रिचा मिश्रा ने कहा कि यह व्यवस्था मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लागू की गई है। उनका कहना है कि कई बार डॉक्टरों की लिखावट सही ढंग से न समझ पाने के कारण गलत दवा मरीज तक पहुंच जाती है, इसलिए यह प्रक्रिया अपनाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि लिया जा रहा शुल्क डॉक्टर फीस से संबंधित है।

हालांकि स्थानीय लोग अस्पताल की इस सफाई से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर नजर

मामला सामने आने के बाद अब लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर टिक गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि मरीजों से इस तरह अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए और नियमों की वैधता स्पष्ट की जानी चाहिए।

फिलहाल अटरिया और आसपास के क्षेत्रों में एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है—

“इलाज पहले मिलेगा या शुल्क जमा करने के बाद?”

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