Saturday, October 10, 2026
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सुबह संगम की सेवा, शाम अखाड़े की शिक्षा: ओमप्रकाश पहलवान की प्रेरक कहानी

सुबह संगम की सेवा, शाम अखाड़े की शिक्षा: ओमप्रकाश पहलवान की प्रेरक कहानी
Prayagraj के दारागंज क्षेत्र में एक ऐसा व्यक्तित्व है, जिसने सेवा, संस्कृति और खेल को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। ओमप्रकाश पहलवान पिछले लगभग 30 वर्षों से संगम आने वाले तमिल यात्रियों की सेवा और पहलवानी परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।
सुबह के समय संगम तट पर ओमप्रकाश पहलवान का अलग ही रूप देखने को मिलता है। विभिन्न भाषाओं की जानकारी रखने वाले ओमप्रकाश, विशेष रूप से दक्षिण भारत से आने वाले तमिल श्रद्धालुओं को स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक विधियों में सहयोग प्रदान करते हैं। भाषा की समझ और वर्षों के अनुभव के कारण वे तमिल यात्रियों के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शक बन चुके हैं। दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं को संगम स्नान और पूजा की परंपराओं को समझाने में उनका योगदान सराहनीय माना जाता है।
वहीं शाम ढलते ही उनका दूसरा रूप सामने आता है। रघुनाथ दास व्यायामशाला में वे युवाओं और पहलवानों को कुश्ती के दांव-पेंच सिखाते हैं। वर्षों की साधना और अनुभव के आधार पर वे नई पीढ़ी को न केवल कुश्ती का प्रशिक्षण देते हैं, बल्कि अनुशासन, मेहनत और भारतीय परंपरा का महत्व भी समझाते हैं।
ओमप्रकाश पहलवान का जीवन इस बात का उदाहरण है कि समाज सेवा और खेल दोनों को साथ लेकर भी समाज में विशेष पहचान बनाई जा सकती है। सुबह आस्था की सेवा और शाम को युवाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाने का उनका प्रयास क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
संक्षिप्त परिचय
नाम: ओमप्रकाश पहलवान
निवास: दारागंज, प्रयागराज
विशेषता: विभिन्न भाषाओं का ज्ञान
सेवा अनुभव: लगभग 30 वर्ष
सुबह का कार्य: तमिल यात्रियों को स्नान एवं पूजा में सहयोग
शाम का कार्य: रघुनाथ दास व्यायामशाला में पहलवानों को दांव-पेंच सिखाना

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