CO एडिटर हिमांशी मिश्रा
सफाई के नाम पर खानापूर्ति के आरोप, एक घर पर बैठकर चाय-नाश्ता करने के बाद लौटने की शिकायत; आखिर जिम्मेदार अधिकारी क्यों बने हैं मौन?
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!फतेहपुर, बाराबंकी। नगर क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गलियों में जगह-जगह फैली गंदगी और घरों में जमा कूड़े ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। सफाई व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आ रही है। लोगों का सवाल है कि जब सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी घरों से कूड़ा उठाना और गलियों को साफ रखना है, तो फिर कूड़ा जमा क्यों हो रहा है? आखिर नगर प्रशासन और संबंधित विभाग इस समस्या पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं?
सफाई के नाम पर खानापूर्ति? चाय-नाश्ते के बाद लौटने की शिकायत
स्थानीय स्तर पर सफाई कर्मियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायत है कि कुछ सफाई कर्मी क्षेत्र में पहुंचने के बाद एक घर पर बैठकर चाय-नाश्ता करते हैं और इसके बाद बिना कूड़ा उठाए ही वापस लौट जाते हैं। यदि ये शिकायतें सही हैं, तो यह सफाई व्यवस्था की निगरानी और कर्मचारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सफाई कर्मी क्षेत्र में आते हैं, तो घरों से कूड़ा उठाने का काम पूरा क्यों नहीं किया जाता? क्या उनकी ड्यूटी की नियमित निगरानी हो रही है? क्या संबंधित अधिकारी यह जांच करते हैं कि कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में वास्तव में सफाई कर रहे हैं या नहीं?
एक ओर घरों में कूड़ा जमा रहने की शिकायतें हैं, तो दूसरी ओर गलियों में गंदगी का माहौल बना हुआ है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सफाई व्यवस्था के नाम पर हो क्या रहा है?
घरों में जमा कूड़ा, गलियों में गंदगी का अंबार
फतेहपुर क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रही शिकायतें नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं। घरों से समय पर कूड़ा नहीं उठने और गलियों की नियमित सफाई नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नियमित सफाई और कूड़ा उठान सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। यदि कर्मचारी क्षेत्र में पहुंचने के बावजूद अपना काम पूरा नहीं करते, तो उनकी कार्यप्रणाली की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। केवल कर्मचारियों की तैनाती कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि निर्धारित कार्य वास्तव में पूरा हो रहा है।
नगर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
अब सवाल नगर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर है। क्या अधिकारियों को क्षेत्र की वास्तविक स्थिति की जानकारी है? क्या सफाई कर्मियों की उपस्थिति और उनके काम की जांच की जाती है? यदि कर्मचारी कूड़ा उठाए बिना लौट रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
लोगों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना चाहिए। साथ ही, सफाई कर्मियों के कार्यों की नियमित समीक्षा कर शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
गंदगी से बढ़ सकती हैं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां
घरों में लंबे समय तक कूड़ा जमा रहने और गलियों में गंदगी फैलने से दुर्गंध तथा मक्खियों और अन्य कीटों की समस्या बढ़ सकती है। यदि गंदगी के साथ जलभराव भी हो, तो मच्छरों के पनपने की आशंका रहती है। इससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ऐसे में सफाई व्यवस्था में लापरवाही की शिकायतों को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। नगर प्रशासन को समय पर कूड़ा उठान और नियमित सफाई सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
आखिर कब जागेगा नगर प्रशासन?
फतेहपुर, बाराबंकी में सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब संबंधित विभाग से कार्रवाई की अपेक्षा है। अधिकारियों को शिकायत वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सफाई कर्मी निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन करें।
यदि जांच में कूड़ा उठाए बिना लौटने या ड्यूटी में लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सफाई व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी अपनी भूमिका का निर्वहन किस तरह कर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि नगर प्रशासन इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर क्या कार्रवाई करता है। क्या घरों से कूड़ा उठाने और गलियों की सफाई की व्यवस्था सुधरेगी, या फिर लोगों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा? फिलहाल, सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब और जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई का इंतजार है।
सफाई कर्मियों के चाय-नाश्ता करने और कूड़ा उठाए बिना लौटने संबंधी बात शिकायत के रूप में सामने आई है। प्रकाशन से पहले संबंधित पक्ष का बयान और उपलब्ध साक्ष्य लेना खबर की निष्पक्षता के लिए उचित होगा।

