प्रियांशु मिश्रा निष्पक्ष रिपोर्टर
फतेहपुर, बाराबंकी। आदर्श नगर पंचायत फतेहपुर में सफाई व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर पंचायत को आदर्श बनाने का दावा भले ही किया जाता हो, लेकिन जमीनी तस्वीर कई स्थानों पर इसके उलट नजर आ रही है। सुबह के समय जिन सड़कों और मोहल्लों में नियमित सफाई और कूड़ा उठाने की व्यवस्था दिखाई देनी चाहिए, वहां कई जगह देर तक कूड़े के ढेर नजर आने से नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले नगर पंचायत के सफाई कर्मचारी सुबह समय से अपने कार्य पर पहुंचकर झाड़ू लगाने और कूड़ा उठाने का काम करते थे, लेकिन अब कई इलाकों में सफाई व्यवस्था में देरी होने लगी है। लोगों का कहना है कि सुबह के समय कूड़ा उठने के बजाय कई स्थानों पर 10 बजे के बाद तक कचरा पड़ा रहता है। ऐसे में राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को गंदगी के बीच से गुजरना पड़ता है।

मामला बंगाली गली से लेकर मोहल्ला पचघरा तक का बताया जा रहा है, जहां सड़क किनारे और नालियों के आसपास कूड़ा जमा होने की तस्वीरें सामने आई हैं। कूड़े के ढेर में पड़ी पॉलिथीन और अन्य गंदगी खुले में पड़ी होने के कारण आवारा पशु भी वहां पहुंच रहे हैं। पशुओं द्वारा प्लास्टिक और कचरा खाने से उनके स्वास्थ्य पर भी खतरा पैदा हो रहा है। सवाल यह है कि यदि कूड़ा समय से उठाया जाए और सफाई व्यवस्था नियमित रूप से संचालित हो तो सड़क किनारे इस तरह कचरे के ढेर लगने की स्थिति ही क्यों बने?

नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था का उद्देश्य केवल झाड़ू लगाना या कूड़ा उठाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखना भी है। इसके बावजूद यदि व्यस्त मोहल्लों और मुख्य रास्तों के आसपास घंटों तक कचरा पड़ा रहे तो यह व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। सफाई कर्मचारियों की समयबद्ध उपस्थिति, उनके कार्यों की निगरानी और कूड़ा उठाने की नियमित व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी है, यह सवाल भी अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत स्तर पर यदि कर्मचारियों के काम की नियमित निगरानी हो और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सुबह के समय ही अलग-अलग मोहल्लों का निरीक्षण किया जाए तो ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी नहीं रह सकती। लोगों का यह भी कहना है कि सफाई व्यवस्था में लापरवाही का असर सीधे आम नागरिकों पर पड़ता है और बरसात या गर्मी के मौसम में जमा कचरा दुर्गंध तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।

फतेहपुर नगर पंचायत को आदर्श नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद यदि उसके मोहल्लों में समय से सफाई और कूड़ा उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो यह व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर प्रश्न है। सवाल नगर पंचायत की कार्यप्रणाली से भी है और उन जिम्मेदार अधिकारियों से भी, जिनकी निगरानी में सफाई व्यवस्था संचालित होती है। आखिर कर्मचारियों की लापरवाही पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती? सुबह की सफाई व्यवस्था को लेकर स्पष्ट समय-सारिणी का पालन क्यों नहीं कराया जा रहा? और सड़क किनारे पड़े कचरे को तत्काल हटाने की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही?

अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि नियमित निगरानी और जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई की है। नगर पंचायत प्रशासन को चाहिए कि वह संबंधित क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करे, समय से कूड़ा उठवाए और जिन स्तरों पर लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय करे। क्योंकि शहर की सफाई केवल कागजों और दावों से नहीं, बल्कि सड़कों और मोहल्लों की वास्तविक तस्वीर से दिखाई देती है।

