रिपोर्ट: कल्याण कठाणे, स्टेट ब्यूरो हेड, महाराष्ट्र
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नई दिल्ली। शिवसेना के आधिकारिक नाम और ‘धनुषबाण’ चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे बहुचर्चित विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हुई इस सुनवाई में उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के फरवरी 2023 के फैसले को चुनौती देते हुए अपने पक्ष में विस्तृत दलीलें पेश कीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े प्रमुख मुद्दों का संकलित विवरण (कंपाइलेशन) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 के लिए निर्धारित कर दी।
क्या है पूरा विवाद?
शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद की शुरुआत जून 2022 में हुई, जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 40 विधायकों और 10 निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। इसके बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई और दोनों पक्षों ने स्वयं को असली शिवसेना बताया।
मामला पहले चुनाव आयोग के पास पहुंचा और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। इस विवाद का केंद्र बिंदु शिवसेना का आधिकारिक नाम और उसका पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘धनुषबाण’ रहा है।
चुनाव आयोग के फैसले को दी गई चुनौती
फरवरी 2023 में केंद्रीय चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को शिवसेना का आधिकारिक नाम और ‘धनुषबाण’ चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया था। इस निर्णय को उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग ने निर्णय देते समय पार्टी के संविधान और संगठनात्मक ढांचे के महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया। इसी आधार पर आयोग के फैसले को रद्द करने की मांग की गई है।
कपिल सिब्बल ने रखी उद्धव गुट की दलील
उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से इस मामले का अंतिम समाधान नहीं हो पाने के कारण राजनीतिक दलों में अस्थिरता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के एक दल से दूसरे दल में जाने की घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
उन्होंने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे दल-बदल विरोधी कानून के रूप में जाना जाता है, की मूल भावना को बनाए रखने के लिए इस विवाद का शीघ्र समाधान आवश्यक है।
पार्टी और विधायी दल को बताया अलग इकाई
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने संविधान पीठ के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक दल और उसका विधायी दल दो अलग-अलग संस्थाएं हैं। उनके अनुसार किसी राजनीतिक दल की पहचान केवल उसके विधायकों की संख्या से तय नहीं की जा सकती, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और संविधान को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने निर्णय देते समय पार्टी प्रमुख की भूमिका और संगठनात्मक व्यवस्था के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा संकलित विवरण
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी प्रमुख कानूनी और तथ्यात्मक मुद्दों का संकलित विवरण (Compilation) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इससे अगली सुनवाई के दौरान सभी पहलुओं पर व्यवस्थित ढंग से विचार किया जा सकेगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को होगी, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों को आगे बढ़ाएंगे।
फैसले पर देशभर की नजर
शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़ा यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मामले में आने वाला अंतिम फैसला राजनीतिक दलों की आंतरिक संरचना, चुनाव आयोग की शक्तियों और दल-बदल संबंधी कानूनों की व्याख्या पर भी प्रभाव डाल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का समाधान भविष्य में ऐसे मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।
निष्कर्ष
शिवसेना के नाम और ‘धनुषबाण’ चुनाव चिन्ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई फिलहाल जारी है। अदालत ने मामले से जुड़े प्रमुख मुद्दों का संकलित विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 तय की है। अंतिम निर्णय आने तक महाराष्ट्र की राजनीति और इस महत्वपूर्ण कानूनी विवाद पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

