रिपोर्ट: रितेश कन्नौजिया, संवाददाता बस्ती
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बस्ती जनपद ने रविवार को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली। नक्सल मुक्त भारत के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में लगभग 2500 महिलाओं ने एक साथ भगवान श्रीराम का पारंपरिक सोहर गाकर नया इतिहास रच दिया। इस विशाल सांस्कृतिक आयोजन को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया, जिसके बाद पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला।
यह भव्य कार्यक्रम पहल संस्था के तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की अनूठी झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम स्थल पूरी तरह भक्ति, संस्कृति और उत्साह के रंग में रंगा नजर आया।

सामूहिक सोहर गान से गूंजा पूरा परिसर
कार्यक्रम के दौरान हजारों महिलाओं ने एक साथ भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव से जुड़े पारंपरिक सोहर गीत गाए। सामूहिक स्वर में गूंजते सोहर ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ महिलाओं का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास है। महिलाओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में भाग लेकर यह संदेश दिया कि भारतीय लोक परंपराएं आज भी समाज की आत्मा हैं।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ आयोजन
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का अवलोकन करने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के जज ऋषि नाथ भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पूरे आयोजन की प्रक्रिया का निरीक्षण किया और 2500 महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से सोहर गान किए जाने के रिकॉर्ड को आधिकारिक रूप से दर्ज किया।
जैसे ही वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज होने की घोषणा हुई, पूरे परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और महिलाओं के इस ऐतिहासिक योगदान की सराहना की।
महिलाओं ने जताया प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के प्रति आभार
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि देश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण बना है और नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या पर नियंत्रण देश की बड़ी उपलब्धि है।
महिलाओं का कहना था कि आज देश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंच रहा है।
पहल संस्था ने दिया सामाजिक एकता का संदेश
पहल संस्था के संस्थापक एवं समाजसेवी मनीष मिश्रा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय से देश के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ था, लेकिन केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रभावी रणनीति के चलते देश अब नक्सलवाद मुक्त बनने की दिशा में सफल हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सुरक्षा के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता और विकास के लिए भी बेहद जरूरी है। मनीष मिश्रा ने कहा कि बस्ती की महिलाओं ने सामूहिक सोहर गान के जरिए यह संदेश दिया है कि महिलाएं अब राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बस्ती को विकसित जनपद बनाने का संकल्प
मनीष मिश्रा ने कहा कि बस्ती की महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर जिले को विकास के नए आयाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से बस्ती को उत्तर प्रदेश का प्रथम विकसित जनपद बनाने का सपना साकार किया जा सकता है।
कार्यक्रम में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने भी महिलाओं के इस प्रयास की सराहना की और इसे जिले के लिए गर्व का विषय बताया।
संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम
पूरे आयोजन के दौरान भारतीय लोक संस्कृति और सनातन परंपरा की अद्भुत झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं द्वारा प्रस्तुत सोहर गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया।
लोगों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं। कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि भारतीय परंपराएं आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं और उन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
जिले में दिखा उत्साह और गौरव
इस ऐतिहासिक उपलब्धि को लेकर पूरे बस्ती जिले में उत्साह का माहौल देखने को मिला। लोगों ने इसे बस्ती की नई पहचान और गौरव से जोड़कर देखा। कार्यक्रम में संजय मिश्रा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
यह आयोजन न केवल एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बना, बल्कि भारतीय संस्कृति, महिला शक्ति और सामाजिक एकता का भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।

