रिपोर्ट: शमशाद आलम, ब्यूरो
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बस्ती में हाल ही में विभिन्न आरोपों को लेकर चर्चा में आए बस्ती लाइफ लाइन अस्पताल के संचालक डॉ. तारिक ने पत्रकार वार्ता कर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग व्यक्तिगत स्वार्थ और दबाव बनाने के उद्देश्य से अस्पताल और उनके प्रोफेशन को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।
दक्षिण दरवाजा स्थित एक मैरेज हाल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. तारिक ने कहा कि पिछले कुछ मामलों को लेकर चार-पांच लोग लगातार अस्पताल पर अनावश्यक आरोप लगा रहे हैं और नाजायज लाभ लेने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों के संबंध में जानकारी एकत्र कर ली गई है और इसकी शिकायत जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक से भी की गई है।
“पूरे मेडिकल प्रोफेशन को किया जा रहा बदनाम”
पत्रकारों से बातचीत में डॉ. तारिक ने कहा कि यह मामला केवल एक अस्पताल या डॉक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ लोग पूरे मेडिकल प्रोफेशन की छवि खराब करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि लगातार हो रहे विवादों और आरोपों के कारण डॉक्टर अब गंभीर और क्रिटिकल मरीजों का इलाज करने से भी बचने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। डॉक्टरों में भय और असुरक्षा का माहौल बनना किसी भी समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
“आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत”
डॉ. तारिक ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की जबरदस्ती या दबाव में भर्ती नहीं किया जाता। मरीज और उनके परिजन स्वयं अपनी इच्छा से अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में हजारों मरीजों का सफल इलाज किया गया है और कई गंभीर मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौटे हैं। लेकिन कुछ मामलों में यदि इलाज का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता तो पूरा दोष डॉक्टर और अस्पताल पर मढ़ दिया जाता है, जो उचित नहीं है।
इलाज से पहले ली जाती है सहमति
डॉ. तारिक ने बताया कि अस्पताल में इलाज शुरू करने से पहले मरीज या उनके परिजनों से आवश्यक सहमति पत्र (कन्सेन्ट) लिया जाता है। सभी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार की जाती हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कुछ लोग तथ्यों को नजरअंदाज कर अस्पताल की छवि खराब करने का प्रयास करते हैं। उनका कहना था कि चिकित्सा क्षेत्र में हर मरीज की स्थिति अलग होती है और कई बार पूरी कोशिश के बाद भी मरीज को बचाया नहीं जा सकता।
अस्पताल में लगे हैं सीसीटीवी कैमरे
प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. तारिक ने कहा कि अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और हर जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखे जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो अस्पताल प्रशासन सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज सार्वजनिक करने को तैयार है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अस्पताल पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है और किसी भी जांच में सहयोग देने के लिए तैयार है। उनका कहना था कि बिना जांच और तथ्यों के किसी भी संस्थान को बदनाम करना उचित नहीं है।
कानून का सहारा लेने की चेतावनी
डॉ. तारिक ने स्पष्ट कहा कि यदि इस तरह की गतिविधियां बंद नहीं हुईं तो वे कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने प्रशासन से भी मांग की कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं जो गलत आरोप लगाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का उद्देश्य लोगों की जान बचाना और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना होता है। ऐसे में समाज को भी चिकित्सा क्षेत्र के प्रति सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और बिना तथ्यों के अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों और अस्पतालों पर लगातार बढ़ते विवाद स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकते हैं। यदि डॉक्टरों में असुरक्षा की भावना बढ़ेगी तो गंभीर मरीजों के इलाज में कठिनाइयां सामने आ सकती हैं।
फिलहाल डॉ. तारिक की प्रेस वार्ता के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।

