जौनपुर में शनिवार को रमज़ान के 30 रोज़े पूरे होने के बाद मुस्लिम समुदाय ने ईद-उल-फितर की नमाज़ अदा की। इस वर्ष ईद की खुशियों पर ग़म का असर साफ तौर पर देखा गया। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत और मासूम बच्चियों की मौत की खबरों ने त्योहार की रौनक को कम कर दिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!शहर के विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज़ अदा करने के लिए एकत्र हुए। हुसैनिया नकी फाटक में धर्मगुरु मौलाना सफ़दर हुसैन ज़ैदी ने ईद की नमाज़ अदा कराई। नमाज़ से पहले अपने खुतबे में मौलाना ने देश और दुनिया में अमन, शांति और भाईचारे के लिए दुआ की।
मौलाना सफ़दर हुसैन ज़ैदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह ईद सामान्य परिस्थितियों वाली नहीं है, बल्कि ग़म और सब्र का पैगाम देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि आयतुल्लाह ख़ामेनई और मासूम बच्चियों की शहादत ने पूरी उम्मत को दुखी किया है, जिसके कारण इस बार खुशियों का इज़हार सादगी से करने की अपील की गई।
नमाज़ के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने काली पट्टी और काले कपड़े पहनकर नमाज़ अदा की। यह ग़म और एकजुटता का प्रतीक था। लोगों के चेहरों पर खुशी के साथ-साथ मायूसी भी साफ झलक रही थी।
मौलाना ज़ैदी ने लोगों से ईद को सादगी, आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने अफवाहों से दूर रहने और शासन-प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करने का भी आह्वान किया।
इस अवसर पर सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई, मोहम्मद मुस्तफ़ा, लाडले ज़ैदी, मोहम्मद अब्बास समर, शाहिद ज़ैदी, शमीमुल हसन बब्बू, हसन मेहदी, जैगम अब्बास, हसनैन कमर दीपू, मोहसिन खान, सरदार हुसैन बबलू और पत्रकार आरिफ़ हुसैनी सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

