जलालाबाद शाहजहांपुर। तहसील जलालाबाद के विभिन्न ग्राम पंचायतों में सैकड़ों राशन कार्ड धारकों के नाम बिना किसी पूर्व सूचना के निरस्त किए जाने का मामला सामने आया है। कई परिवारों के कार्ड से नाम पूरी तरह हट जाने से गरीब उपभोक्ताओं के सामने रोजमर्रा के खाद्यान्न का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित लोग सरकार की मुफ्त राशन योजना पर निर्भर थे, ऐसे में अचानक नाम कटने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पात्र होने के बावजूद उनके नाम हटा दिए गए, जबकि कई अपात्र अब भी योजना का लाभ उठा रहे हैं। उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन पूर्ति विभाग स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि बिना कारण बताए नाम काटना अन्यायपूर्ण है और इससे गरीब परिवारों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
प्रभावित परिवारों में अधिकतर दिहाड़ी मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग शामिल हैं, जो राशन योजना के सहारे अपना गुजर-बसर कर रहे थे। अचानक नाम हट जाने से उन्हें बाजार से महंगा अनाज खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे लोगों में आक्रोश और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इस मामले में पूर्ति अधिकारी आर एन मौर्य का कहना है कि नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से सरकार के ऑटोमेटिक सिस्टम के माध्यम से हो रही है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के बैंक खातों में दो लाख रुपये से अधिक का लेन-देन पाया गया, जिन्होंने आयकर रिटर्न दाखिल किया है, जिनके पास अधिक भूमि या बड़े वाहन हैं, या जिनके आधार कार्ड अन्य दस्तावेजों से लिंक हो चुके हैं, उनके नाम स्वतः हटाए जा रहे हैं।
हालांकि, विभागीय तर्क के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई ऐसे परिवार भी प्रभावित हुए हैं जो खुद को पात्र बताते हैं। अब उपभोक्ता उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की तैयारी में हैं। इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह ऑटोमेटिक सिस्टम वास्तव में अपात्रों को बाहर कर रहा है या फिर इसके दायरे में गरीब और जरूरतमंद भी आ रहे हैं।
राशन कार्ड से नाम गायब,सैकड़ों गरीब उपभोक्ता परेशान पूर्ति विभाग बोला ऑटोमेटिक सिस्टम का असर
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