वाराणसी: आध्यात्मिक जगत के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। परम पूज्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कर कमलों द्वारा उनके ही गूढ़ प्रवचनों पर आधारित विशेष पुस्तक ‘अनासक्तिः दुख से निवृत्ति का सूत्र’ का विमोचन संपन्न हुआ। यह पुस्तक श्रद्धालुओं को जीवन के दुखों से मुक्ति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु संकलित की गई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अपने ही शिष्य के कार्य पर जताया हर्ष
विमोचन के अवसर पर विद्वतजनों और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य जी भावुक नजर आए। उन्होंने पुस्तक की सामग्री से अधिक इसके संपादक बटुक योगेश नाथ त्रिपाठी की सराहना की। महाराज जी ने कहा, “प्रसन्नता इस बात की नहीं है कि यह मेरे प्रवचनों का संकलन है, बल्कि गर्व इस बात का है कि हमारे ही विद्यालय के छात्र योगेश नाथ त्रिपाठी ने इसका इतनी कुशलता से संपादन किया है।”
शिष्य को दिया स्वर्णिम भविष्य का आशीर्वाद
शंकराचार्य जी ने इसे संतोष का क्षण बताते हुए संपादक योगेश नाथ त्रिपाठी को अपना विशेष शुभाशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने मंगलकामना की कि योगेश भविष्य में भी इसी प्रकार के गूढ़ और शास्त्रीय ग्रंथों का संपादन कर समाज को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करते रहें।
समारोह में उपस्थित रहे
इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रकाशन विभाग के प्रमुख रंजन शर्मा, महाराज जी के सचिव किशोर दवे, डॉ. शशिकांत यादव, पंकज पांडेय और डॉ. निशिता सहित कई गणमान्य सहयोगी उपस्थित रहे।

