निष्पक्ष पत्रकार समाचार/मोहम्मद फैसल सिद्दीकी/मसौली बाराबंकी। बुधवार की देर रात्रिमे क्षेत्र के ग्राम सिसवारा स्थित दिगंबरनाथ मंदिर पर शुरु हुई 5 दिवसीय श्रीमदभागवत कथा अमृत वर्षा के पहले दिन कथावाचक रामहेत यादव रसिया ने सुखदेव की कथा सुनाकर कर भक्ति मे लीन कर दिया। भगवतकथा के प्रथम दिन कथावाचक ने कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव जब पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। तब एक तोता हुंकारी भरता था.शिव ने त्रिशूल से उसका पीछा किया तो वह भागकर वेदव्यास के आश्रम में घुस गया और उनकी पत्नी के गर्भ में छिप गया। जहां वह 12 साल तक रहा। श्रीकृष्ण के आश्वासन के बाद वह गर्भ से बाहर निकला जन्मते ही वह संसार से विरक्त होकर वन की ओर भागा लेकिन श्रीव्यासजी के बार-बार कहने पर वह श्रीमद्भागवत कथा का ज्ञान अर्जित किया और राजा परीक्षित को भागवत सुनाई कथावाचक रामहेत यादव ने बताया कि महर्षि सुखदेव ने राजा जनक को अपना गुरु स्वीकार किया था। महर्षि वेदव्यास ने अपने पुत्र शुकदेव को ज्ञान प्राप्त करने और मोह से मुक्त होने के लिए राजा जनक के पास भेजा था। जिसके बाद राजा जनक ने शुकदेव को अपनी परीक्षाएँ लेने के बाद दीक्षित किया। इन परीक्षाओं से गुजरने के बाद शुकदेव को राजा जनक के वैराग्य और ज्ञान का अनुभव हुआ, और अंततः उन्होंने राजा जनक को अपना गुरु स्वीकार किया। इस मौक़े पर अध्यक्ष ओमकार यादव,रामलाल यादव,लल्लू वर्मा,गोकुल वर्मा,संदीप वर्मा,आकाश वर्मा,ओमप्रकाश यादव, भानुप्रताप रावत,प्रदीप कुमार, अमरेश,राकेश,अवधेश लाइन मैन आदि भक्त मौजूद रहे।
रिपोटर मोहम्मद फैसल सिद्दीकी बाराबंकी
